क्या आप हिन्दू है? यदि है तो अपने अपने धार्मिक पर्व और अनुष्ठान के अवसर पर अपने पुरोहित की अच्छी खासी दक्षिणा जरुर दो होगी। लेकिन
क्या आपने अपने पुरोहित से कभी पूछा कि उसने कर्मकाण्ड के समय दीपक क्योंजलाया तिलक क्यों लगाया दाहिनी कलाई में कलावा क्यों आंधा बाई में क्यों
नहीं? अनुष्ठान में रोली चावल दूब ही क्यों लिए काजल नील चला बाजरा खर पतवार क्यों नहीं लिए? शायद आपने इनके बारे में अपने पुरोहित से कभी नही
पूछा और जब आपने ईष्वर की आराधना जैसे महत्वपूर्ण कार्य में भी पुरोहित द्वारा किये जाने वाले क्रिया कलापों के बारे में अब तक नहीं जाना तो बताईये आप
जड़ या चेतन? आपकी हिन्दुत्व के प्रति जागरुकता क्या है? क्या पंडित से हवन यज्ञ आदि कर्मकाण्ड कराना ही आपका हिन्दुत्व है? आपने अमेरिका जापान
फ्रांस जर्मनी कनाडा आदि देशों के नाम सुने होंगे लेकिन क्या इन देशों के दूसरे नाम सुने है? क्या इन देशो के नाम का दूसरा भाषा में अनुवाद किया गया है या
अनुवाद किया जा सकता है। शायद नहीं। आप अपने देश का नाम भारत बताते है लेकिन दुनिया के नक्षे में आपके देश का नाम इण्डिया है। आप जब पासपोर्ट
वीजा लेंगे तो उसमें आपकी नागरिकता इण्डियन लिखी जायेगी भारतीय नहीं। ऐसा क्यों है जब अमेरिका का नागरिक अमेरिका जापान का जापानी होता है तो
भारत का नागरिक भारतीय क्यों नही हो सकता? विदेशियों के लिए इस देश में प्रेसिडेन्ट आंफ इण्डिया, प्राइम मिनिस्टर आंफ इण्डिया, गर्वनमेंट आंफ इंडिया,
रिजर्व बैंक आंफ इण्डिया है। केन्द्र सरकार का हर मंत्री मिनिस्टर आंफ इण्डियाहै, भारत का नहीं। तो ऐसे में कौन आपके देश को भारत और आपकों भारतीय
कहेगा? अगर बात भारतीय की है तो बताइये भारतीय कहां है। आपके समाज में ब्राहमण वैश्य क्षत्रिय शूद्र वर्ग की हजारों जातियों वाले शान से अपने नाम के
आगे अपनी जाति गोत्र तो लिखते है लेकिन भारतीय नहीं लिखते सामाजिक एकता के हामी कुछ लोग लिखते है। आजादी के बासठ साल में ही राजनेताओं ने
आपको बिरादरियों में बांट दिया। राजनेता जब आपकी बिरादरी के सम्मेलन में आपकी बिरादरी की आन बान शान की तारीफ करते हुए आपके जज्बातों को
भड़काते है तो आपका सीना गर्व से फूल जाता है। लेकिन क्या आपने कभी अपने प्रिय नेता से यह पूछा है कि वो भारतीय को बिरादरी में क्यों बांट रहा है। क्यों
वह बिरादरी के जज्बातों को भड़का कर राष्ट्रीय एकता की जड़ो को काट रहा है? यह आपकी जड़ता है या चेतनता? क्या आपकों याद नहीं कि बिरादरीवाद की
वजह से ही मिश्र, ईरान, नेपाल, तिब्बत, वर्मा, श्रीलंका तक फैला हुआ आपका वृहद आर्यवृत्त देश सिकुड कर छोटा सा भारत बन गया। आपके अन्दर
पनपते हुए बिरादरीवाद की वजह से राष्ट्रविरोधी शक्तियां जोर शोर से भारत का और छोटा करने की साजिषों में लगी हुई है। नेपाल का हिन्दु राष्ट्र स्वरुप खत्म कर
दिया गया। बिरादरीवाद की वजह से ही हिन्दू हजार वर्ष तक गुलाम रहे। वैदिक काल के आर्य से हिन्दू मायने जाहिर कायर हो गये।
रुस, चीन, जापान, फ्रांस, अमेरिका, ब्रिटेन, जर्मनी आदि सब देशो में उच्च शिक्षा भी अपनी मातृभाषा में दी जाती है। और अपनी
मातृभाषा में शिक्षा ग्रहण कर इन देशो के नागरिक अपने देश को शक्तिशाली बना रहे है नि नये नये अविष्कार कर रहे है। लेकिन दुनियां का ज्ञान-विज्ञान,
गणित, योग, आध्यात्म देकर जगदगुरु कहलाने वाले देश को नागरिक विदेषी भाषा पढ़ कर कोई अविष्कार करना तो दूर की बात अपनी संस्कृति सभ्यता का
ही नाश करने में जुटे हुए है। जब दुनिया भर के देश अपनी मातृभाषा में शिक्षा देकर अपने देश को शक्तिशाली बना हरे है। तो भारत में ऐसा क्यों नही हो रहा है।
पहचानिये उन लोगों को जो आजादी के बाद से ही खास कर कांग्रेस को आपको गलतराह पर ले जा रहे है। देश के युवकों को उनकी मातृभाषा में उच्च विज्ञान
चिकित्सा तकनीकि शिक्षा देने की व्यवस्था जिन्होंने आजादी से अब तक नहीं की और न ही अब करते नजर आ रहे है। अगर ऐसे लोगों राजनीतिज्ञों को आप नहीं
पहचानतें तो यह आपकी जडता है हिन्दुत्व के प्रति लापरवाही है।
आप हिन्दू है? वैदिक काल के वो हिन्दू जिनका साम्राज्य आज के दौर में लाखों किमी दूर स्थित कई देशो तक फैला हुआ था लेकिन अपनी जड़ता
लापरवाही बिरादरीवाद जाति श्रेष्ठता का अहम् और क्षेत्रियता ने हिन्दुओं की जमीन जायदाद दौलत छीनकर विधर्मियों ने मारपीट कर भगा दिया। वे हिन्दू कश्मीरी
अपने ही आजाद देश शरणार्थी बन कर बदहाल जिन्दगी गुजार रहे है इस पर कही कोई हलचल नहीं सारे देश के हिन्दू खामोश बैठे हुए है। आप और आपकी
सरकार भी चुप है। क्यों चुप है? आज कश्मीर कल अन्य प्रान्तों में यही होगा या नहीं? क्योंकि आप हिन्दू है आप में प्रतिरोध की क्षमता नहीं है यह क्षमता
आपसी वैमन्स्य और जातिय श्रेष्ठता के अहम की वजह से सदियों पहले ही खत्म हो चुकी है?
याद कीजिए शक हूणों की दासता को। याद कीजिये गौरी गजनवी कासिम बाबर के थोड़े से सैनिकों की बदौलत इस्लाम ने इस देश पर आठ सौ
साल तक राज कैसे किया? थोडे से अंग्रेज व्यापारियों की बदौलत अंग्रेजों ने दो सौ साल इस देश पर राज कैसे किया था? उत्तर एक ही है हिन्दुओं में एकता न
होने और उनकी कायरता के कारण। आश्चर्य होता है जिस धर्म के देवताओं ने ही नहीं देवियों ने भी भंयकर युद्ध लड़े हो उस धर्म के अनुयायी इतने कायर कैसे बन
गये कि कोई भी विदेशी हमलावार उन्हें सदियों तक गुलाम बनाये रखे? आश्चर्य यह भी है हिन्दुओ को सनमार्ग दिखाने वाले तथाकथित साधु, सन्त, ऋषि,
मुनि, मठाधीष और तथाकथित शंकराचार्यो की भीषण हिन्दू विरोधी परिस्थितियों में क्रांति का बिगुल बजाने के लिए व्याकुल हो जाना चाहिए था वे सभी खामोश
है उन पर हिन्दुओं के पतन का कोई प्रभाव नहीं पड़ा। वे हिन्दुओं की अन्धी धार्मिक आस्थाओं का लाभ उठाते हुए मुफत के मालपुड़े खाकर ए सी में सोते जाग
कर मंस्टण्डे हो रहे है। क्यों हिन्दुओं में इतनी ताकत भी नही है कि हिन्दुओ को भयानक अवनति की स्थिति में ए सी में सोने वाले मस्टण्डे साधु सन्तों मठाधीशो
तथा तथाकथित शंकराचार्यो को हिन्दू जागरण के लिए उनके मठों से बाहर खदेडे? लेकिन यह कदापि सम्भव नही है क्योंकि इन शातिर तथाकथित साधु सन्तों
आदि ने हिन्दुओं के दिमाग में यह बात गहराई से बैठा रखी है जब जब हिन्दू धर्म की हानि होगी जब जब भगवान अवतार लेकर हिन्दुओं का उद्धार करेंगे। शायद
किसी साधु सन्त ने आज तक हिन्दुओं को यह सच नहीं बताया कि भगवान सदैव उसकी मदद करते है जो अपनी इच्छा पूर्ति के लिए कठिन परिश्रम करते है।
भगवान नालायक और अचेतन व्यक्ति की कभी मदद नहीं करते। यदि आप हिन्दू है तो बताईये आप कब तक अचेतन बने रहेंगे? बिरादरीवाद के मामले कब तक
अपने राष्ट्र और हिन्दुत्व को भुलाये रखेंगे?