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श्री राम जी की सेना चली
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पापियों के नाश को धर्म के प्रकाश को ।
श्री राम जी की सेना चली राम जी की सेना चली ।।
पाप अनाचार में घोर अन्धकार में ।
एक नई ज्याति जली श्री राम जी की सेना चली ।।।।
निशचर हीन करेंगे धरती यह प्रण है श्री राम का ।
जब तक पूरा काम न होगा नाम नहीं विश्राम का ।।।
इसे मिटाने चले कि जिसका प्रण वयं रक्षाम का ।
समय आ चला निकट राम और रावण के संग्राम का ।।
तीन लोक धन्य है देवता प्रसन्न हैं
आज मनोकामना फली श्री राम जी की सेना चली ।।।।
राम चन्द्र जी के संग लक्ष्मण कर में लेकर बाण चले
लिए विजय विश्वास द्य में संग वीर हनुमान चले
उसे बचाए कौन कि जिसका वध करने भगवान चले
सेना संग सुग्रीव नील नल , अंगद छाती तान चले
आगे रघुनाथ है ,वीर साथ साथ है , एक से एक बली ।
श्री राम जी की सेना चली , राम जी की सेना चली ।।
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