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युवराज को बताना बलात्कारी, समरीते को पड़ा भारी
कांग्रेस के युवराज राहुल गांधी को बलात्कारी बताना किशोर समरीते को भारी पड़ गया है. एक ओर जहां इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने उनके खिलाफ पचास लाख का जुर्माना किया है वहीं सरकार ने इस पूरे मामले में सीबीआई जांच का आदेश दे दिया है. हालांकि समरीते का कहना है कि हाईकोर्ट के फैसले के बाद वे अब सुप्रीम कोर्ट जाने की तैयारी कर रहे हैं. 1 मार्च को इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने राहुल गांधी के नाम एक नोटिस जारी करते हुए उनसे पूछा था कि वे इस संबंध में अदालत को अपने पक्ष से अवगत कराएं. राहुल गांधी को अदालत ने दो सप्ताह का वक्त दिया था. लेकिन एक सप्ताह के भीतर ही अदालत में एक डबल बेंच बैठी और उसने न केवल उस याचिका को खारिज कर दिया जिसमें राहुल गांधी द्वारा सुकन्या तथा उसके परिजनों को बंधक बनाकर रख लेने का संदेह जताया गया था बल्कि याचिकाकर्ता किशोर समरीते पर पचास लाख का जुर्माना भी लगा दिया. जुर्माने की इस रकम में 25 लाख रूपये उस लड़की को दिये जाएंगे जिसका नाम आ रहा है, 20 लाख रूपये राहुल गांधी को दिये जाएंगे और पांच लाख रुपये की रकम पुलिस महानिदेशक को दिये जाएंगे जिन्होंने समय के भीतर पीड़ित परिजनों को हाजिर कर दिया. याचिकाकर्ता किशोर समरीते का कहना हैं कि हाईकोर्ट के फैसले के बाद वे सुप्रीम कोर्ट जाने की तैयारी कर रहे हैं. सुनवाई के दौरान राज्य के पुलिस महानिदेशक करमवीर सिंह ने मामले की सुनवाई के दौरान आज बलराम सिंह, उनकी पत्नी सावित्री और पुत्री सुकन्या को अदालत में पेश किया। तीनों ने कहा कि न तो उनका अपहरण हुआ और न उन पर कोई जुल्म किया गया। अब किशोर समरीते सवाल उठा रहे हैं कि जिन लोगों को सुकन्या देवी, बलराम सिंह और सावित्री देवी बनाकर पुलिस ने अदालत के सामने पेश किया है वे वह हैं ही नहीं. अदालत के सामने झूठे लोगों को पेश िकया गया है. समरीते बताते हैं कि जिसे सुकन्या देवी बताकर पुलिस ने अदालत के सामने पेश किया है उसका नाम मोना है, जबकि सावित्री देवी की जगह कीर्ति सिंह और बलराम सिंह की जगह डॉ बलराम सिंह को पेश किया गया है. किशोर कहते हैं कि उनके पास इस बात के पुख्ता सबूत हैं और उन्हीं सबूतों के आधार पर वे सुप्रीम कोर्ट जाने की तैयारी कर रहे हैं. 2006 में घटित इस कथित घटना के संबंध में जो खबरें आयी हैं उससे कांग्रेस पार्टी में खासा रोष है. कांग्रेस ने पूरे मामले की सीबीआई जांच की मांग की थी जिसे देखते हुए केन्द्र ने सीबीआई जांच का आदेश दे दिया है. 8 मार्च को एक विज्ञप्ति जारी करके कहा था कि राहुल गांधी की छवि खराब करने के लिए जानबूझकर कुछ लोग इस तरह की अफवाह फैला रहे हैं.
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