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सांस्कृतिक गौरव संस्थान

लक्ष्य
सांस्कृतिक गौरव संस्थान का लक्ष्य प्रत्येक नागरिक के मन और मस्तिष्क में अगले दशक तक एक शान्त क्रान्ति लाना है ।
1 - एक ऐसा वातावरण उत्पन्न करना जहाँ हममें से लघुतम व्यक्ति भी यह सोचना आरम्भ करे कि वह कैसे , कहाँ और क्या राष्ट्र को दे सकता है किन्तु वह राष्ट्र से क्या छीन सकता है , ऐसा आत्मघाती चिन्तन और व्यवहार किसी दशा में न करे ।
2 - हमारे मौलिक कर्त्तव्यों के प्रति जागरूकता का विकास करना और उनकी पूर्ति के लिए एक दूसरे को प्रेरणा प्रदान करना ।
3 - जीनव के प्रति रस, निष्पादन में उत्कृष्टता का निर्माण करना जिससे आत्मसम्मान की भावना बढ़े और सच्ची देश भक्ति का जोश उत्पन्न हो ।
4 - हमारे देश की वैभवशाली सांस्कृतिक निधि, सत्यनिष्ठा और संप्रभुता के संरक्षण के लिए रक्षा तन्त्र की एक सशक्त प्राचीर खड़ी करना ।
5 - राष्ट्रीय स्वाभिमान जगाना और ऐसा वातावरण बनाना जिसमें प्रत्येक नागरिक , चाहे वह बड़ा हो या छोटा, अपनी पूरी क्षमता का अर्जन कर सके ।

मिशन की महती आवश्यकता क्यों है

भारत के संविधान के अनुच्छेद 51( क ) के ज्वलंत तत्त्व निम्न हैं :
- भारत की संप्रभुता, एकता और अखण्डता बनाए रखना और उसकी रक्षा करना ।
- समृद्ध भारतीय सांस्कृतिक निधि को सम्मान देना और उसका संरक्षण ।
भारतीय मूल्यों और सांस्कृतिक निधि के संरक्षण के बिना भौगोलिक भारत की रक्षा का कोई अर्थ नहीं है । भौगोलिक भारत के बिना समृद्ध भारतीय संस्कृति की रक्षा संभव नहीं होगी । दोनों की ओर एक साथ ध्यान देकर तत्काल कार्यवाही अपरिहार्य है ।
इस व्यायाम की महती आवश्यकता इस तथ्य में छिपी है कि अन्य संस्कृतियों ( जैसे , ईसाइयत , इस्लाम या नास्तिकता ) के अनेक भौगोलिक क्षेत्र हैं जहाँ वे फल फूल सकती हैं । किन्तु भारतीय मूल्यों , सांस्कृतिक निधि और संस्कृति के लिए तो भारत ही एक मात्र भूमि है ।

कार्य योजना

सांस्कृतिक गौरव संस्थान के मिशन के उद्देश्यों के पूर्ति के लिए कार्य योजना निम्नलिखित है :
- उन सब व्यक्तियों और समूहों की व्यापक और बहुमूल्य प्रतिभा का लाभ उठाना जिनमें मत निर्माता बनने या मत निर्माता निकाय बनने की संभावनाए हैं , जो इस आंदोलन को नेतृत्त्व दे सकें और सम्पूर्ण देश में फैले हुए विभिन्न संप्रदायों , जातियों और उपजातियों और पंथों के सभी देश भक्तों को आकर्षित कर सकें ।
- विषयवार आँकड़ा कोश बनाकर उसका विश्लेषण करना और कम्प्यूटर प्रणाली के एक जाल के माध्यम से सांस्कृतिक गौरव संस्थान की सभी शाखाओं के साथ आदान प्रदान ।
- सम्पादक के नाम पत्र , स्थिति सूचक पत्र , पत्रक , समाचार पत्रिकाएं पुस्तिकाएं और पुस्तकें तैयार करना जिससे भारत के और विश्व के लोगों में एक तरफ तो भारत की संस्कृति और मूल्यों को दूषित करने वाले मुद्दों की ओर ध्यान दिलाया जा सके और दूसरी तरफ भारत की सम्प्रभुता , एकता और अखण्डता के प्रति जागृति पैदा की जा सके ।
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