भारत के प्रधानमंत्री सरदार मनमोहन सिंह जी के नाम खुला पत्र
आदरणीय प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह जी
जय श्रीराम सतश्री अकाल
प्रधानमंत्री के नाते दूसरे कार्यकाल को शुरू करने के लिए आपको हमारी ओर से हार्दिक बधाई। अपने पहले कार्यकाल में आपने हिन्दुस्थान को दारुल इस्लाम बनाने की दिशा में कई बड़े-बड़े काम किए हैं जिनमें से कुछ ये हैं -
1. केन्द्रीय मंत्रीमंडल में अल्पसंख्यक मामलों का मंत्रालय बनाने के साथ-साथ उसके लिए अलग केबिनेट मंत्री नियुक्त करना
2. केबीनेट मंत्री के नाते जाने-माने इस्लाम परस्त व्यक्ति अब्दुल रहमान अंतुले को केबिनेट मंत्री बनाना
3. यह घोषणा करना कि देश के संसाधनों पर पहला अधिकार मुसलमानों का है
3. यह घोषणा करना कि देश के संसाधनों पर पहला अधिकार मुसलमानों का है
4. राजेन्द्र सच्चर की अध्यक्षता में मुसलमानों की आर्थिक दशा का आकलन करने और उसके सुधार के उपाय सुझाने के लिए सच्चर कमेटी का गठन और उस समिति की झूठी-सच्ची रिपोर्ट के आधर पर मुसलमानों को देश में अधिक से अधिक सुविधाएं, नौकरियां, छात्रवृत्तियां दिलाने का घोर सांप्रदायिक अभियान
5. मुसलमानों और अन्य अल्पसंख्यकों के उन छात्रोंछात्राओं को छात्रवृत्तियां देना जिनके परिवार की वार्षिक आमदनी 2 लाख रुपये या उससे कम हो। इसका परिणाम यह हुआ है कि अनेक हिन्दू परिवार मुसलमान बनने के लिए तैयार हो गए हैं।
6. मज़हबी जुनून से जन्मे पाकिस्तान की जन्मदात्री ‘अलीगढ़ मुस्लिम युनिवर्सिटी’ की तर्ज पर देश में तीन अन्य विष-बीज बोने (निर्माण) हेतु विश्वविद्यालयों के लिए करोड़ों रुपयों का अनुदान दिया जा रहा है।
ऐसे अनेक और भी उदाहरण है जिनसे हिन्दुस्थान को दारुल-इस्लाम बनाने के लिए आपके कार्यकाल में पूरी-पूरी कोशिश हुई है जिनमें हज यात्राओं की सब्सिडी, हज हाउसों का बड़ी संख्या में सरकारी भूमि पर सरकारी पैसे से निर्माण और अर्धसैनिक बलों में मुसलमानों की भर्ती का ज़ोरदार अभियान आदि शामिल हैं।
अब चूंकि आपका दूसरा कार्यकाल शुरू हो गया है, इसलिए यह बहुत ज़रूरी है कि आप हिन्दुस्थान के इस्लामीकरण की दिशा में और अध्कि तेज़ी से कार्रवाई करें ताकि इस देश में आप अनंत काल तक प्रधनमंत्री बने रह सकें। इसके लिए हमारे कुछ सुझाव निम्नलिखित हैंः-
1. चूंकि देश के लगभग 15 प्रतिशत मुसलमानों के लिए हर साल लगभग 15 हज़ार करोड़ रुपये अल्पसंख्यक वित्त एवं विकास निगम के द्वारा लगभग ब्याजमुक्त रिणों के रूप में, 80 मुस्लिम बहुल ज़िलों में अनेक प्रकार की सुविधाएं देने आदि के लिए खर्च किए जा रहे हैं जबकि सामान्यतः मुसलमानों से हरेक वर्ष शायद अधिकतम डेढ़ से दो प्रतिशत आयकर (इन्कम टैक्स), कुल वैट की लगभग डेढ़ से दो प्रतिशत धनराशि, सेवाकर शायद बिल्कुल नहीं आदि मिलते हैं,(इस बारे में सच्चर कमेटी ने कोई सूचना इकट्टी नहीं की) इसलिए अच्छा यह होगा कि मुसलमानों को पूरी तरह आयकर, सेवाकर, वैट, बिक्रीकर ;यदि कहीं होद्ध, उत्पाद शुल्क, सीमा शुल्क आदि से मुक्त कर दिया जाएं और उनसे कुछ न लिया जाए, जैसा कि सन् 1200 से 1710 ई. तक हिन्दुस्थान में हुआ।
2. आयकर, सेवाकर, वैट, बिक्रीकर, उत्पाद शुल्क, सीमा शुल्क आदि करों का नया नामकरण करके हिन्दुओं के लिए उन्हें जज़िया टैक्स नंबर 1, 2, 3, 4, 5 तथा 6 आदि नामों से जाना जाए जिससे मुसलमानों के मुल्लाओं को यह लगने लगे कि हिन्दुस्थान अब दारुल-हरब नहीं है दारुल-इस्लाम हो गया है। हो सकता है कि इससे हिन्दुस्थान में आतंकवादी हमले, जिसके कारण सारे देश में दहशत का माहौल है, खत्म हो जाए और मुसलमानों के मुल्लाओं की हिन्दुस्थान को दारुल इस्लाम बनाने की कोशिशों की आवश्यकता ही नहीं रहेगी क्योंकि आप इस काम को पूरा करने में सहयोग दे रहे हैं।
इस दिशा में कुछ और भी सुझाव हो सकते हैं, फिलहाल इतना ही काफी होगा। विश्वास है कि आप हमारे इस अनुरोध् को स्वीकार करके जल्दी से जल्दी संसद में इस बारे में कानून बनवाकर अपने आपको गाज़ी सिद्ध कर सकेंगे।
शुभकामनाओं सहित,
आपका
बैकुण्ठ लाल शर्मा ‘प्रेम सिंह शेर’
पूर्व सांसद्