हिन्दुस्थान राष्ट्र निरंतर किसी न किसी विदेशी सत्ता के अधीन बना रहा - तथा हिन्दुस्थान का इतिहास मानों हिन्दुओं के सतत
पराभव की ही एक गाथा है इस प्रकार का सरासर झूठा, अपमानजनक और दुष्ट हेतु से किया गया प्रचार चालू सिक्कों की तरह न केवल विदेशियों के ही द्वारा, अपितु स्वबंधुओं के द्वारा भी बेरोकटोक व्यवहृत किया जा रहा है । इस असत्य प्रचार का प्रतिकार करना न केवल राष्ट्रीय स्वाभिमान की दृष्टि से ही आवश्यक है अपितु ऐतिहासिक सत्य के उदघाटन की दृष्टि से भी ऐसा करना वांछनीय है । आज तक इस दिशा में जो इतिहासज्ञ प्रयत्नशील रहे हैं उनके प्रयासों में सहायक बनना और उनके प्रचार को अधिक तीव्रता प्रदान करना एक राष्ट्रीय कर्तव्य है ।
इसलिए जिन जिन विदेशी शक्तियों ने भारत पर आक्रमण् किया अथवा यहाँ पर अपना
राज्य प्रस्थापित किया उस सभी शासकों का पराभव कर हिन्दू राष्ट्र को जिन्होनें स्वाधीनता प्रदान की उन वीर , हिन्दूराष्ट्रोद्वारक
पीढि़यों और उनके प्रतीक स्वरूप जिन प्रमुख नेताओं ने उन संग्रामों का नेतृत्व किया उन युग प्रवर्तक महापुरूषों का ऐतिहासिक
चित्रण करने का यहां निश्चय किया गया है ।