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संघ पर आरोप लगाने से पहले कृपया एक बार सोंचें
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बहुत से अन्य संगठनों के कार्य करने वाले कार्यकर्ता बंधु जो संघ को नहीं जानते हैं संघ पर आरोप लगाते हैं कि संघ इतना बड़ा संगठन कोकर भी ये नहीं करता है वो नहीं करता है जबकि जितनी उसकी शक्ति है उस हिसाब से उसे ये करना चाहिए वो करना चाहिए । उन संभी कार्यकार्ता बंधुओं से निवेदन है कि वे संघ के बाहर बैठ कर ही टीका टिप्पणी न करें बल्कि संघ की शाखा में आएं संघ को जानने का प्रयास करें । पहली बात तो यह कि संघ का केवल नाम ही देशवासियों ने सुन रखा है । संघ द्वारा क्या क्या कार्य देश व विदेश में चलाए जा रहे हैं उसके बारे में ये लोग 5 प्रतिशत भी नहीं जानते हैं जैसे महीप सिंह ने दैनिक जागरण में संघ पर आरोप लगाया कि संघ केवल मंदिर बनाने की बात करता है पर अस्पर्शय कही जाने वाली जातियों के साथ भेद भाव को खत्म करने के दिशा में कोई सार्थक प्रयास नहीं करता है । संघ में प्रारम्भ से ही छुआछूत के लिए कोई स्थान नहीं है एक बार जब गांधी जी संघ के शिविर में आए तो उन्होंने स्वयं इस बात की प्रंशंसा की कि मैं जो कार्य करने के लिए कह रहा हू संघ ने उसे करके दिखाया है शिविर में एक दूसरे व्यक्ति को भी नहीं पता था कि पड़ोस वाले की जाति क्या है । आज भी संघ के लगने वाले 7 व 2० दिवसीय शिविरों में हजारों की संख्या में लोग भाग लेते हैं एवं बिना की भेदभाव के पूरा समय व्यतीत करके अपने अपने घरो को यही भावना लेकर अपने अपने क्षेत्रों में जाते हैं । यह कार्य विगत 85 वषें से चल रहा है । राम मंदिर का शिलान्यास भी इसी कारण एक दलित पुजारी से कराया गया था । इसी में एक उल्लेखनीय बात यह है कि कर्नाटक के उडुपी में सन 1969 में संघ के द्वितीय संरसंघचालक गुरू जी ने के भागीरथी प्रयासों द्वारा एक संत समागम हुआ जिसमें सभी संतों ने एक स्वर से इस सूत्र से नए युग का प्रारम्भ किया हिन्दवः सहोदरा सर्वे न हिन्दू पतितों भवेत मम दीक्षा हिन्दू रक्षा मम मत्रं समानता अर्थात सभी हिन्दू सगे सहोदर भाई हैं कोई हिन्दू नीच या पति नही नहीं हो सकता सभी हिन्दुओं की रक्षा मेरी दीक्षा और समानता मेरा मंत्र है । उसी प्रकार से कुछ लोग टिप्पणी करते संघ को यह कार्य करना चाहिए यह करना चाहिए । उन सभी बंधुओं से निवेदन है कि आप सभी की बातों से सहमत होते हुए भी संघ आपके साथ कार्य नहीं कर सकता है इसे जरा समझे । संघ एक ऐसा संगठन है जिसका निर्माण हिन्दू समाज को संगठित करने के हुआ है। यह एक बिजली निर्माण करने वाले जैनेरेटर की तरह से है बिजली द्वारा बहुत से कार्य होते हैं । पर यदि जैनेरेटर बिजली न बनाकर केवल पंखा चलाने लग जाएगा तो सारे कार्य बंद हो जाएगें पंखा भी नहीं चल पाएगा । कई बार बहुत सी सही बातों के होते हुए भी आप भी बहुत से कार्य नहीं कर पाते होंगे उसी प्रकार से संघ की स्थिति हैं । संघ द्वारा कितने कार्य चलाए जारहे हैं उसकी एक झलक आपयहां से ले सकते हैं । http://www.sanghparivar.org/links/view/all/1
फिर भी जो अत्यधिक आवश्यक हैं वे करने के लिए संघ प्रयास करता है । जैसे भारतीय जनसंघ की स्थानपा का ख्याल श्यामा प्रसाद मुखर्जी के मन में आया तो उन्होंने इस बात को गुरू जी से कहा । राजनीति को भी एक आवश्यक कार्य मानकर गुरू जी ने दीनदयाल उपाध्याय नाना जी देश मुख और अटलबिहारी जैसे कार्यकर्ताओं को राजनीति के क्षेत्र में कार्य करने के लिए भेजा । पर अपना समाज के संगठन का कार्य भी निर्बाध रूप से चलता रहे इसका भी ध्यान रखा । इसीलए सभी देशहित में कार्य करने वाले कार्यकताओं से निवेदन है कि संघ पर कोई भी अरोप लगाने से पहले वे संघ को संघ के अंदर आकर जानने का प्रयास करें उसके बाद कोई टीका टिप्पणी करें तो अच्छा होगा । जैसे इस साइट को बनाने से पूर्व मैं स्वयं सोचता था कि संघ के पास इतना सारा साहित्य हिन्दुत्व व इस्लाम से संबंधित है उसे आनलाइन क्यों नहीं किया जा रहा है जबकि वर्तमान परिस्थितियों को देखते हुए यह अत्यावश्यक है पर यदि मैं यही सोचता रहता और संघ टीका टिप्पणी करता रहता तो यह महत्वपूर्ण कार्य नहीं हो पाता तो मैंने एक कार्यकर्ता से कहा मैं ये कार्य करूं तो कैसा रहेगा और उन्होंने कहा ठीक है । और आज साइट पर इस्लाम से संबंधित काफी साहित्य है । इसी प्रकार कोई कहे कि संघ द्वारा हिन्दुत्व के विरूद्घ लिखने वालों पर अदालत में मुकदमा दायर क्यों नहीं किया जा रहा है तो भारत की अदालत से आप किस प्रकार न्याय की आशा करेंगे जब अयोध्या मामले में सारे साक्ष्य हमारे पक्ष में होने के बावजूद अदालत द्वारा मंदिर के पक्ष में इतने वर्षों के बाद भी निर्णय नहीं दिया जा रहा है । मकबूल फिदा हुसैन पर सबसे पहले हरिद्वार के एक संघ के कार्यकर्ता द्वारा ही मुकदमा दायर किया गया था । अब हुसैन की चित्रकारी को प्रत्यक्ष देखने के बाद भी अदालत द्वारा आज तक उसे सजा क्यों नहीं सुनाई गयी और भगोड़ा घोषित नहीं किया गया यह समझ से बाहर है । अतः आप जो भी कार्य करना चाहते हैं तो स्वयं करने का प्रयास करें संघ के साथ विचार विमर्श करें समाधान तो मिलेगा ही ।
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