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एक मुस्लिम युवती Zara Khaan के शब्दोँ मेँ---
एक मुस्लिम युवती Zara Khaan के शब्दोँ मेँ--- हम बिना मुंह छिपाये(बुर्का पहने) घर से नहीं निकल सकती ... हम पति ,पिता के साथ दीन की इनायत को मस्जिद नहीं जा सकते पुरुषो के साथ बैठकर अर्ज अदा नहीं कर सकते ... जब तक हममे सब्र है तब तक हमे बच्चे पैदा करने ही पड़ेंगे... अगर रोका तो अल्लाह के नुमाइंदे प्रताड़ित करने को स्वतंत्र है.. हमसे अंजाने मे हुयी एक छोटी सी खता पर सिर्फ तीन शब्द (तलाक, तलाक ,तलाक ) बोलकर हमे मरने के लिए छोड़ा जा सकता है हमे अपनी कोई भी बात स्वतन्त्रता से कहने का कोई अधकार नहीं है ..जिसमे सच बोल देना या औरतों द्वारा अपनी बात कह देना ही सबसे बड़ा गुनाह है .. कैसा इस्लाम है ये ? कैसा अल्लाह कैसा रसूल कैसा दीन है ये जिसमे औरतों को इंसान नहीं समझा जाता .. में नकारती हु ऐसे धर्म को , वो धर्म धर्म कैसे हो सकता है जिसमे समानता का अधिकार नहीं है , जिसमे जन्म देने वाली ,उत्पत्ति करने वाली नारी को सिर्फ बच्चे पैदा करने की खेती और शारीरिक उपभोग की वस्तु मात्र समझा जाता है ,, कितनी भी बाधाए आयी या चाहे आए , मे खुले दिल , पूरे ईमान , से स्वीकार करती हू हिन्दुओ के उस सत्य सनातन धर्म को , जिसमे होने वाली हर पुजा मे , में पति के साथ बैठती हू .... भगवान की आराधना को साथ मंदिर जाती हू , जिसमे सात जन्मो के बंधन को तीन शब्द नहीं तोड़ सकते ..... मे प्रेम करती हु राम कृष्ण शिव या उन भगवान से जिनके लिए उनकी हर संतान समान है ...जो परम दयालु है , जिनके लिए उनके भक्त कैसे भी हो वो प्रेम ही करते है... जो बात बात पर दोज़ख की आग की धमकी नहीं देते .... मेरे तहेदिल से शुक्रगुजार हू उन भगवान की जो मुझे नर्क से स्वर्ग की और ले आए ... में समर्पित हू उस सनातन धर्म के प्रति जिसमे औरतों को इंसान ही नहीं अच्छे कर्मो के कारण देवी तक की उपमा दी जाती है ... सनातन धर्म की स्थापना सम्पूर्ण विश्व मे हो.
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